पाठ – 17. कोशिश करनेवालों की हार नहीं होती
कवि का नाम : सोहनलाल द्विवेदी
एक वाक्य में उत्तर लिखिए ।
1. सोहनलाल दिववेदी जी का जन्म और मृत्यु कब हुई ?
2. सोहनलाल द्विवेदी जी किस पत्रिका के संपादक थे ?
3. सोहनलाल द्विवेदी जी ने अवैतिक ( बिना वेतन) से किस पत्रिका का संपादन किया ?
उत्तर: सोहनलाल द्विवेदी जी ने अवैतिक ( बिना वेतन) से ‘बाल सखा’ पत्रिका का संपादन किया।
4. सोहनलाल द्विवेदी जी किससे अत्यधिक प्रभावित थे ?
उत्तर: सोहनलाल द्विवेदी जी महात्मा गाँधीजी से अत्यधिक प्रभावित थे ।
5. सोहनलाल द्विवेदी जी को किस उपाधि से अलंकृत किया गया है ?
उत्तर : सोहनलाल द्विवेदी जी को ‘राष्ट्रकवि’ नामक उपाधि से अलंकृत किया गया है।
6. सोहनलाल द्विवेदी जी की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौनसी है ?
उत्तर: भैरवी, वासवदत्ता, कुणाल, पूजागीत, विषपान, युग्धारा, जय गाँधी आदी
7. सोहनलाल द्विवेदी जी की प्रमुख बाल साहित्य कौनसी हैं ?
उत्तर:बाल भारती, शिशु भारती, बिगुल, बासुरी, नेहरू चाचा आदी हैं।
8. किससे डरकर नौका पार नहीं होती ?
उत्तर: लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती।
9. किनकी हार नहीं होती है ?
उत्तर : कोशिश करनेवालों की हार नहीं होती है ।
10. दाना लेकर कौन चलती है ?
उत्तर: चींटी, दाना लेकर चलती है।
11. चींटी कहाँ चढती है ?
उत्तर: चींटी दीवार पर चढ़ती है।
12. किसकी मेहनत बेकार नहीं होती ?
उत्तर : कोशिश करनेवालों की मेहनत बेकार नहीं होती।
13. सागर में डुबकियाँ कौन लगाता है ?
उत्तर: गोताखोर सागर में डुबकियों लगाता है।
14. मोती कहाँ मिलता है ?
उत्तर: मोती सागर के गहरे पानी में मिलता है
15. किसकी मुट्ठी खाली नहीं होती ?
उत्तर: कोशिश करने वालों की मुट्ठी खाली नहीं होती है। bbbbvउत्तर : संघर्ष का मैदान छोड़कर भागना नहीं चाहिए।
16. किसका मैदान छोड़कर भागना नहीं चाहिए ?
17. कुछ किये बिना ही क्या नहीं होती है ?
दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए।
उत्तर: कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती है ।
1. चींटी के बारे में कवि क्या कहते हैं ?
उत्तर: कवि सोहनलाल द्विवेदी चींटी के बारे में कहते है कि, नन्हीं चींटी दाना ले जाते समय दीवारों पर चढ़ती और सौ बार पिसलती (गिरती ) है। फिर भी मन का विश्वास नहीं छोड़ती, नहीं डरती कोशिश करता है। अंत में चींटी दिवार पर चढ़कर यश पाता है।
2. गोताखोर के बारे में कवि के विचार क्या हैं ?
उत्त्र: गोताखोर सागर में कई बार डूबकर खाली हाथ वापस लौट आता है। सहज पानी में मोती नहीं मिलते है, उसके लिए गहरे पानी में जाना पडता है। इससे उसकी उत्साह दुगना बढ़ता रहता है। अंत में उसकी हाथ खाली नहीं रहती है।
3. असफलता से सफलता की ओर जाने के बारे में कवि क्या संदेश देते है ?
उत्तर : असफलता एक चुनौती है, हमें इसे स्वीकार करना चाहिए ।
असफलता का कारण पहचानकर गलतियों को सुधारना चाहिए।
जब तक हम हमारे काम में सफल नहीं होते तब तक नींद और चैन को त्याग देना चाहिए।
संघर्ष का मैदान छोड़कर हम भागना नहीं चाहिए। .
हम कुछ किये बिना हमारी जय जयकार नहीं होती है।
असफलता से सफलता की ओर जाने के बारे में कवि संदेश देते हुए कहते है
उदाहरण के अनुसार तुकांत शब्दों को पहचानकर लिखिए :
उदाः पार – हार
चलती – ________
भरता – __________
लगाता – _________
बार – __________
स्वीकार – __________
उत्तरः
फिसलती;
अखरता;
आता;
हार;
सुधार।
भावार्थ लिखिए :
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करनेवालों की कभी हार नहीं होती।
उत्तर:
लगातार प्रयत्न करने से सफलता निश्चित मिलती है। असफलता से घबराना नहीं चाहिए। जैसे चींटी जब दाना लेकर दीवार पर चढ़ती है तो कई बार फिसलकर गिरती है। लेकिन वह दीवार पर चढ़ने का प्रयत्न जारी रखती है। अपना आत्मविश्वास नहीं खोती। ऐसे में असफलताएँ निराश नहीं करती है। और अंत में मेहनत का फल मिलता है। क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं हो सकती। असफलता के बाद सफलता जरूर मिलती है।
पाठ – 17. कोशिश करनेवालों की हार नहीं होती
कवि का नाम : सोहनलाल द्विवेदी
एक वाक्य में उत्तर लिखिए ।
1. सोहनलाल दिववेदी जी का जन्म और मृत्यु कब हुई ?
2. सोहनलाल द्विवेदी जी किस पत्रिका के संपादक थे ?
3. सोहनलाल द्विवेदी जी ने अवैतिक ( बिना वेतन) से किस पत्रिका का संपादन किया ?
उत्तर: सोहनलाल द्विवेदी जी ने अवैतिक ( बिना वेतन) से ‘बाल सखा’ पत्रिका का संपादन किया।
4. सोहनलाल द्विवेदी जी किससे अत्यधिक प्रभावित थे ?
उत्तर: सोहनलाल द्विवेदी जी महात्मा गाँधीजी से अत्यधिक प्रभावित थे ।
5. सोहनलाल द्विवेदी जी को किस उपाधि से अलंकृत किया गया है ?
उत्तर : सोहनलाल द्विवेदी जी को ‘राष्ट्रकवि’ नामक उपाधि से अलंकृत किया गया है।
6. सोहनलाल द्विवेदी जी की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौनसी है ?
उत्तर: भैरवी, वासवदत्ता, कुणाल, पूजागीत, विषपान, युग्धारा, जय गाँधी आदी
7. सोहनलाल द्विवेदी जी की प्रमुख बाल साहित्य कौनसी हैं ?
उत्तर:बाल भारती, शिशु भारती, बिगुल, बासुरी, नेहरू चाचा आदी हैं।
8. किससे डरकर नौका पार नहीं होती ?
उत्तर: लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती।
9. किनकी हार नहीं होती है ?
उत्तर : कोशिश करनेवालों की हार नहीं होती है ।
10. दाना लेकर कौन चलती है ?
उत्तर: चींटी, दाना लेकर चलती है।
11. चींटी कहाँ चढती है ?
उत्तर: चींटी दीवार पर चढ़ती है।
12. किसकी मेहनत बेकार नहीं होती ?
उत्तर : कोशिश करनेवालों की मेहनत बेकार नहीं होती।
13. सागर में डुबकियाँ कौन लगाता है ?
उत्तर: गोताखोर सागर में डुबकियों लगाता है।
14. मोती कहाँ मिलता है ?
उत्तर: मोती सागर के गहरे पानी में मिलता है
15. किसकी मुट्ठी खाली नहीं होती ?
उत्तर: कोशिश करने वालों की मुट्ठी खाली नहीं होती है। उत्तर : संघर्ष का मैदान छोड़कर भागना नहीं चाहिए।
16. किसका मैदान छोड़कर भागना नहीं चाहिए ?
17. कुछ किये बिना ही क्या नहीं होती है ?
दो-तीन वाक्यों में उत्तर लिखिए।
उत्तर: कुछ किये बिना ही जय जयकार नहीं होती है ।
1. चींटी के बारे में कवि क्या कहते हैं ?
उत्तर: कवि सोहनलाल द्विवेदी चींटी के बारे में कहते है कि, नन्हीं चींटी दाना ले जाते समय दीवारों पर चढ़ती और सौ बार पिसलती (गिरती ) है। फिर भी मन का विश्वास नहीं छोड़ती, नहीं डरती कोशिश करता है। अंत में चींटी दिवार पर चढ़कर यश पाता है।
2. गोताखोर के बारे में कवि के विचार क्या हैं ?
उत्त्र: गोताखोर सागर में कई बार डूबकर खाली हाथ वापस लौट आता है। सहज पानी में मोती नहीं मिलते है, उसके लिए गहरे पानी में जाना पडता है। इससे उसकी उत्साह दुगना बढ़ता रहता है। अंत में उसकी हाथ खाली नहीं रहती है।
3. असफलता से सफलता की ओर जाने के बारे में कवि क्या संदेश देते है ?
उत्तर : असफलता एक चुनौती है, हमें इसे स्वीकार करना चाहिए ।
असफलता का कारण पहचानकर गलतियों को सुधारना चाहिए।
जब तक हम हमारे काम में सफल नहीं होते तब तक नींद और चैन को त्याग देना चाहिए।
संघर्ष का मैदान छोड़कर हम भागना नहीं चाहिए। .
हम कुछ किये बिना हमारी जय जयकार नहीं होती है।
असफलता से सफलता की ओर जाने के बारे में कवि संदेश देते हुए कहते है
उदाहरण के अनुसार तुकांत शब्दों को पहचानकर लिखिए :
उदाः पार – हार
चलती – ________
भरता – __________
लगाता – _________
बार – __________
स्वीकार – __________
उत्तरः
फिसलती;
अखरता;
आता;
हार;
सुधार।
भावार्थ लिखिए :
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करनेवालों की कभी हार नहीं होती।
उत्तर:
लगातार प्रयत्न करने से सफलता निश्चित मिलती है। असफलता से घबराना नहीं चाहिए। जैसे चींटी जब दाना लेकर दीवार पर चढ़ती है तो कई बार फिसलकर गिरती है। लेकिन वह दीवार पर चढ़ने का प्रयत्न जारी रखती है। अपना आत्मविश्वास नहीं खोती। ऐसे में असफलताएँ निराश नहीं करती है। और अंत में मेहनत का फल मिलता है। क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं हो सकती। असफलता के बाद सफलता जरूर मिलती है।
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